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अग्रसेन
वन्दना
अग्रसेन जयंती पर करते पूर्वजों को याद,
सारे अग्रवाल समाज का मेरा धन्यवाद,
मेरा धन्यवाद फले-फूले अग्रसेन का वंश,
छल कपट और मोह माया का रहे ना कोई अंश,
अग्रसेन जयंती मनाता , पूरा देश ये आज,
जय हो, जय हो, जय हो, जय हो, अग्रसेन
महाराज
अग्रसेन जी ने समाज को, दिया नया आकार,
आओं करें हम सब मिलकर, उनका सपना साकार,
एक रुपया एक ईंट से सबकों किया समान,
कम ही होते अग्रसेन जी, जैसे पुरुष महान ॥
हर जाति और धर्म को इसने अपने गले लगाया
अटठारह गोत्रों में बांट के, अपना धर्म
फैलाया
रक्षा की है सदा उसी की, जो भी शरण में आया
भाईचारे और सदभावना का, हमेशा पाठ पढाया
हर क्षेत्र को दिया है इसने, दिल खोलकर दान
कम ही होते हैं अग्रसेन जी, जैसे पुरुष
महान ॥
अपने सतकर्मो के कारण ही तो फैला नाम
पूरे विश्व में आज आपका फैला है व्यापार
लेकिन फिर भी सबसे ज्यादा है माटी से प्यार
हंसते हंसते देश की खातिर, दे दें अपनी जान
कम ही होते अग्रसेन जी, जैसे पुरुष महान
एक प्रतिज्ञा आज करें हम, दिलों पे सबके
राज करें हम
हम अपनी भक्ति पहचाने, सबकों अपना भाई
मानें
अग्रसेन जी का करता है, पूरा विश्व सम्मान
कम ही होते अग्रसेन जी, जैसे पुरुष महान
विस्फोटों से शोभा यात्रा, रुकी न रुक
पाएगी
जाने वालों की कुर्बानी, रंग नया लाएगी
अत्याचारी अन्यायी ही सदा पिटा करते है
बम के विस्फोटों से ना कभी, धर्म मिटा करते
है
श्री अग्रसेन की शोभा यात्रा,देखे सारा
जहान,
कम ही होते अग्रसेन जी, जैसे पुरुष महान
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