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चैन की सांसे लेने दो तुम गांधी के गुजरात
को
दुश्मन ने बारत में आकर, जहर ये कैसा मिला
दिया,
गोधरा वाली घटना ने तो, देश को पूरा हिला
दिया,
और अब इन्ही दरिंदो ने तो, मन्दिर को भी ना
छोड़ा,
छोटे छोटे बच्चों तक से, जीवन ने नाता
तोड़ा,
ईश्वर का घर नही सुरक्षित, हम फिर इंसान
है,
बच्चे बूढे मरें कोई भी, उनको लेनी जान है,
बहुत सहा है हमने अब तक, सभी हदें अब पारी
हुई,
दिन पर दिन आतंकवाद की, और
पैनी धार हुई,
राष्ट्रविरोधी कामयाब, हो रहे रोज अंजाम
में,
खून की होली खेल गए, आतंकी अक्षरधाम में,
शायद फिर हम रोक न पाए, बहते हुए जज्बात
को,
चैन की सांसे लेने दो तुम गांधी के गुजरात
को,
गांधी निति पे चल के ही दूजा आगे गाल किया,
बिरयानी से भरा हुआ जो आपके आगे थाल किया,
इसीलिए तो आज हमारे सिर पर चढकर बैठ गए,
पाकिस्तानी हथियारों को लेकर हमपर ऐंठ गए,
गांधीजी का अंहिसा का सपना भी लाचार हुआ,
बंटवारे की कीमत पर भी बंद ना अत्याचार
हुआ,
हमने सबको एक ही समझा और सबका ही मान किया,
तुमने देश के गौरव संसद मंदिर का निर्माण
किया,
रोज अत्याचारों को हम सहते
–
सहते सो गए,
लगता है जैसे हम खुद भारत में शरणार्थी हो
गए,
अब भी वक्त है संभल जाओं और बढने ना दो बात
को,
चैन की सांसे लेने दो तुम गांधी के गुजरात
को
अंत ना जाने कब होगा और घड़ा पाप का फूटेगा,
आखिर कब तक सहते जाएं बाँध सब्र का टूटेगा,
ना समझे जो प्यार की भाषा उसे काट कर दूर
करों,
देश है दुर्गा काली का ये, मत इतना मजबूर
करो,
छोड़ दो सारे कुकर्मो को आत्मा अपनी शुद्ध
करो,
एक बार फिर वरना आकर सीमा पर तुम युद्ध
करो,
लात के तुम भूत सदा ही, बातों से कब
मानोगे,
लाहौर इस्लामाबाद को, खो दोगे तब जानोगे,
सैनिको की कुर्बानी भी रंग नया दिखलाएगी,
जीत लेंगे इस बार जमीं जो भारत में मिल
जाएगी,
रहो जमीं पर इंसान बन के भूल जाओ तुम घात
को,
चैन की सांसे लेने दो तुम गांधी गुजरात को
जब तक चुप है लेकिन खुन अगर ये खौल गया,
जड़ से काट गिराएंगे अगर जो संयम ये डोल
गया,
कभी ना भर सकते तो ऐसे जख्म दिलों पर छोड़
दिए,
वैष्णो देवी जाने वाली, बस तक में बम फोड़
दिए,
उग्रवाद अब नहीं सहेंगे, सुनते सुनते हार
गए,
नेताओ के सारे भाषण, बार-बार बेकार गए,
चाहे जितना भी समझा लो असर नही हो पाएगा,
जब तक उग्रवादियों को ना, चौंक पे काटा
जाएगा,
तख्ता पलट, पलट करके ही, तुमको है ये तख्त
मिले,
देख लो परमाणु आजमाकर शायद फिर ना वक्त
मिले,
भूल चुके हो अब तक सन 71 वाली लात को,
चैन की सांसे लेने दो तुम गांधी के गुजरात
को ॥
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