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में फिर से लहराया है

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देगा भगवान

चैन की सांसे लेने दो तुम

गांधी के गुजरात को

ये कश्मीर हमारा है

अंहिसा के पुजारी

स्वर्ण जयती

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
   

नव सम्वत


नये साल पर हंसते गाते

होटल क्लब में शोर मचाते

नव सम्वत लगता है ऐसे

जैसे हम कोई श्राद्ध मनाते

नये साल से नही ग्लानि

पर सम्वत को मान मिले

नये साल जितना ही इसको

कम से कम सम्मान मिले

हैलो हाय ही याद है अब तो

भूल गये चन्दन का टीका

नव सम्वत क्यों पड़ गया फ़ीका

नव सम्वत क्यों पड़ गया फ़ीका

 

छोटा सा बस एक उत्सव कर

खुशियों से हम फूल गये

अंग्रेजी चक्कर में पड़कर

संस्कृति को भूल गये

पहले तो चलता था देशी

फिर घुस आए यहाँ विदेशी

देख पराई चमक दमक को

पीछे छूट गया स्वदेशी

टूटा बिल्ली भागों छींका

नव सम्वत क्यों पड़ गया फ़ीका

 

हो चाहे कोई भी मौका

जन्मदिवस या विवाह सगाई

छोड़ के धोती कुर्ता खादी

कोट पैंट और लगती टाई

दो सौ वर्ष की गुलामी ने

लाखों वर्ष की रीत मिटाई

डाइनिंग पर लगता है खाना

फोटो में बस दिखे चटाई

 

सम्वत से है शान राष्ट्र की

अंग्रजी जंजाल है जी का

नव सम्वत क्यों पड़ गया फ़ीका

नव सम्वत क्यों पड़ गया फ़ीका

नया साल है मुम्बई पूना

नव सम्वत  क्यों लगता सूना

आओ मिलकर इसे मनाएं

घर घर मंगल दीप जलाएं

तोड़ गुलामी की जंजीरें

दूर करें इंग्लिश परछाई

एक दूजे को गले लगाकर

नव सम्वत की दो बधाई

दीया जलाएँ देशी घी का

नव सम्वत क्यों पड़ गया फ़ीका

नव सम्वत क्यों पड़ गया फ़ीका


 
 

 

     
 
 

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