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में फिर से लहराया है

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देगा भगवान

चैन की सांसे लेने दो तुम

गांधी के गुजरात को

ये कश्मीर हमारा है

अंहिसा के पुजारी

स्वर्ण जयती

 
   

मोबाइल


मोबाइल वो डिबिया है संदेश जहां पर आते है

उसको संग में रखने वाले मान यहाँ पर पाते है

राज छिपाने की खातिर ये बनी आज मजबूरी है

इस मोबाइल के कारण ही घटती जाती दूरी है

पूरे विश्व के जिस कोने में भी अब मानव जाता है

एक यही मोबाइल है जो उसे ढूंढ दिखलाता है

बाथरुम तक जा पहुँचा है मोबाइल केक्या कहने

इसके आगे सब फीके है चांदी सोने के गहने

उस मोबाइल के रखने को मेरा  दिल भी करता है

लेकिन दिल तो मोबाइल के बिल से केवल डरता है

बिन मोबाइल लगता जैसे जीवन सूनी फाइल है

रिक्शा वाला घूम रहा है लेकर आज मोबाइल है

जब भी कोई किसी बैंक में ॠण लेने को आता है

सबसे पहले मोबाइल का नम्बर पूछा जाता है

जो ना हो मोबाइल नम्बर धक्के मारे जाते है

लौट के बुद्ध बिना काम ही वापस घर को आते है

मोबाइल रखने वाले झूठा भी सच्चा होता है

मोबाइल वाले कवियों का दर्जा ही उठ जाता है

छोटे मोटे कवि सम्मेलन में जाना छूट जाता है

मै भी तो लालायित हूँ मोबाइल अमृत पीने को

मुझको भी चाहिए मोबाइल शीश उठाकर जीने को

मोबाइल वाले चेहरों पर फैली आज स्माईल है

रिक्शा वाला घूम रहा है लेकर आज मोबाइल है॥


 

 

 

 

 

 

 

 

 

 
 

 

     
 
 

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